भारतीय टैलेंट ने Meta को छोड़ा: 8 करोड़ सैलरी के बावजूद नई राह चुनी
रिशभ अग्रवाल ने महज 5 महीने में Meta छोड़ दिया, जहां उन्हें 8 करोड़ की सैलरी मिल रही थी। जानें क्यों किया ऐसा फैसला।
भारतीय प्रतिभा रिशभ अग्रवाल ने सिर्फ पांच महीने में Meta से अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया है। उन्हें वहां सालाना 8 करोड़ रुपये का पैकेज मिल रहा था, लेकिन फिर भी उन्होंने एक नई यात्रा का चयन किया है। यह बात मुख्यतः इसलिए चर्चा में है क्योंकि Meta जैसी बड़ी कंपनी को छोड़ना एक बड़ा निर्णय होता है।
रिशभ, जिन्होंने पहले कई स्टार्टअप्स में काम किया है, ने Meta में मार्क जुकरबर्ग की सुपरइंटेलिजेंस टीम में शामिल किया था। हालांकि, 8 करोड़ की सालाना सैलरी के बावजूद, रिशभ ने ऐसा कदम क्यों उठाया? उन्होंने यह निर्णय अपने जीवन के नए लक्ष्यों और दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए लिया।
सूत्रों के अनुसार, रिशभ की सोच है कि वो अपनी खुद की स्टार्टअप शुरू करने की दिशा में बढ़ना चाहते हैं। अपने स्वतंत्रता और नवीनता की खोज में, उन्होंने Meta को विदाई दी। यह स्थिति उस समय और भी दिलचस्प हो जाती है जब हम देखते हैं कि कई युवा पेशेवर बड़ी कंपनियों को छोड़कर अपना खुद का रास्ता बनाने का निर्णय ले रहे हैं।
Meta जैसी कंपनियों में काम करना जहां एक तरफ अधिकांश पेशेवरों का सपना होता है, वही दूसरी ओर, कुछ युवा इसके साथ-साथ अपनी खुद की खोज और उद्यमिता की तलाश में रहते हैं। रिशभ का यह कदम यह दर्शाता है कि भारतीय युवा सिर्फ अच्छी सैलरी की तलाश में नहीं हैं, बल्कि उनके भीतर एक मजबूत उद्यमिता की भावना भी है।
रिशभ अग्रवाल की यह कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों का पीछा करना चाहते हैं। यह बताता है कि कभी-कभी सफलताओं की परिभाषा केवल पैसों में नहीं होती, बल्कि संतोष और आत्म-अपनी पहचान में भी होती है।
फिलहाल, रिशभ की अगली योजना क्या है, इस पर अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है, लेकिन उनके द्वारा किया गया यह कदम निश्चित रूप से युवाओं को प्रेरित करेगा और सोचने पर मजबूर करेगा कि क्या हम भी अपने जीवन में Bold decisions ले सकते हैं।
रिशभ अग्रवाल का Meta छोड़ना उस मानसिकता को दर्शाता है, जहां युवा न केवल पैसे, बल्कि अपने Passion का भी पीछा कर रहे हैं।